Sunday, February 5, 2012

इन दिनों


मनचीता ताप है
इन धूपीले दिनों में
जिसे चाहने पर ओढ़ना है
अनिच्छा होने पर, मुख मोड़ लेना…

भोर में खिले मयंक को देखा-अदेखा किया जाता है जैसे .

जनवरी विदा होकर ,फरवरी को सौंप गयी
लंबे पहरों की बागडोर
अलसुबह ही नीड़ में फंख फड़फड़ाकर
साँझ तक पाँव पसारे
यहाँ-वहां से अलस कर सिमटता है
उजाला अब

कैक्टस पर नूर है ,
मिर्च के पौधे में नन्हें-सफ़ेद फूल से
चमक-दमक

मैना सर्दियों की ख़ुमारी में
इन दिनों भी टपकते नल के पास
चहलकदमी करती ,भोजन तलाशती है
उसकी आंखों के गिर्द पीला काजल
लुभावना

हवा में गुड़ पकने की गंध है ,
खजूर का गुड़
गले में खराश जगाता
दूर से ही

तन,आधी धूप,आधी छांह में सुस्ताता,
मन,दामोदर किनारे मद्धम चाल से उसकी
मछलियों से बतियाता,
पानी में हाथ डाल उन्हें सहलाता
सुनता विलंबित ख़्याल कोई

इस नदी की रेत पर सुगमता से चलना दूर तक
गंगा की महीन बालू जैसे पैर उलझते नहीं
यहां मेरे


मनचीती धूप में देखना …

वसंत ,अपनी ही छाया पर
नीम की पीली पत्तियों सा
बिखरता-डोलता,विचरता रहता है
हवा के रुख़ पर
इन दिनों




चित्र-गूगल साभार

22 टिप्पणियाँ:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति!

Kailash Sharma said...

बदलते मौसम का बहुत भावपूर्ण चित्रण..लाज़वाब अहसास...बहुत सशक्त प्रस्तुति..

Shanti Garg said...

बहुत बेहतरीन और प्रशंसनीय.......
मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

Anupama Tripathi said...

मन रमता ही गया आपकी रचना पढ़ कर ....चलचित्र की भाँती जी गयी आपकी रचना ....

sidheshwer said...

मनचीती अभिव्यक्ति!

sushma 'आहुति' said...

भावों से नाजुक शब्‍द......बेजोड़ भावाभियक्ति....

नीरज गोस्वामी said...

बहुत दिनों बाद फिर से एक अनूठे चित्र और भाव विभोर करती आपकी रचना से रूबरू होने का मौका मिला है...बहुत खूब...

नीरज

ख़बरनामा said...

बेहतरीन भाव पूर्ण सार्थक रचना.....
खबरनामा की ओर से आभार

दीपशिखा वर्मा / DEEPSHIKHA VERMA said...

आपका ऋतुओं से रिश्ता...बड़ा भाता है :)

अनामिका की सदायें ...... said...

prashansneey prastuti.

Archana said...

"पारुल" चाँद पुखराज का --मन को विलम्बित खयाल सुना गया -- इन दिनों....

ravindra vyas said...

sunder!

प्रवीण पाण्डेय said...

आनन्द बिराजे अब नभ पर..

Avinash Chandra said...

अनूठा!!

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

बहुत खूब!

Anupama Tripathi said...

आपकी किसी पोस्ट की चर्चा है नयी पुरानी हलचल पर कल शनिवार ११-२-२०१२ को। कृपया पधारें और अपने अनमोल विचार ज़रूर दें।

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

बहुत ही बढ़िया।

सादर

sushma 'आहुति' said...

बहुत ही खुबसूरत
और कोमल भावो की अभिवयक्ति..

vidya said...

बहुत बहुत सुन्दर...
बेहतरीन लेखन..
आज से आपका खूबसूरत ब्लॉग फोलो करती हूँ..जाने कैसे अब तक नहीं आना हुआ..

शुभकामनाएँ.

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत सुंदर वर्णन ...

पुष्पेन्द्र वीर साहिल said...

आपकी कविताओं में प्रकृति के रंग घुले रहते हैं... बहुत ही सुन्दर !

पुष्पेन्द्र वीर साहिल said...

वसंत पर आपकी यह खूबसूरत रचना चिरंतन के अंक का सौंदर्य बढ़ा रही है. हार्दिक आभार !

http://sachswapna.blogspot.in