Saturday, November 5, 2011

कारवां के निशां भी उड़ा ले गई




ये हवा सब ले गई
कारवां के निशां भी उड़ा ले गई
उड़ती हवाओं वाले मिलेंगे कहाँ

समय ओ धीरे चलो
बुझ गई राह से छाँव

संगीत- डा० भूपेन हजारिका - विनम्र श्रद्धांजलि

9 टिप्पणियाँ:

प्रवीण पाण्डेय said...

दुखद, गंगा से सभ्यता के बारे में प्रश्न पूछने वाला चला गया।

Arvind Mishra said...

झंझावात है ये ..मेरी भी विनम्र श्रद्धांजलि

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार said...






बहुत याद आओगे भूपेन दा !


विनम्र श्रद्धांजलि !


- राजेन्द्र स्वर्णकार

अनूप शुक्ल said...

भूपेन हजारिका जी को श्रद्धांजलि!

रश्मि प्रभा... said...

shraddhanjli

अनुपमा पाठक said...

दुखद...
विनम्र श्रद्धांजलि!

संगीता पुरी said...

श्रद्धांजलि !!

नीरज गोस्वामी said...

भूपेन दा जैसा न कोई हुआ है न होगा...दिल हूम हूम करे...

नीरज

डॉ. मनोज मिश्र said...

मेरी भी विनम्र श्रद्धांजलि .