
आस-पास, गुज़रते वक़्त की चहलकदमी में एक मीठी दोपहर करवट लेती है . दिन का , रेशमी उजास.... फिसलता .... चमेली के पेड़ की हरी पत्तियों को भिगोता ,उसकी छाया में सुस्ताते उजले फूलों के अंबार पर बूंद-बूंद झरता है
कपोत के जोड़े की अर्द्धचन्द्राकार उड़ान, नीले आसमान के कैनवास पर उभर कर अनायास... ऊंचे पेड़ के कोटर में, ऊंघी गुटुर्गूँ के साथ खुश्क हो जाती है.गालों पर,दक्खिनी हवा के नर्म,मुलायम स्पर्शों की दुलार भरी छाप...
ईंट पर हरी काई की महकती कालीन .... अधबीते इतवार की खैरियत पूछती हुई
एकांत..कि जिसमें अपनें होने का अहसास भी मद्धम सुर में बजता है
सावन , आख़िरी साँसों में निखर , ख़ूब इतराया . रुख बदलती धूप, मन की खिड़कियों से आत्मा के भीतरी फर्श तक बिछ चली ....उसे ,दोनों हथेलियों में थामूं,रोकूँ कि लपेट लूँ उससे जिस्म का, ओर-छोर .
सोलह-सत्रह बरस पहले किसी कैन्टोन्मेन्ट में टहलता-घूमता समय...लहर-लहर बढ़ आया
फ़िल्म का अंतिम दृश्य, मानस पर कौंधा --
जावेद जंग में शहीद हो गया
पचपन साल बाद लंदन में रूथ भी फ़ौत हुई
बिनब्याही
11 टिप्पणियाँ:
सुन्दर पोस्ट....
It is true.....rainy season brings not only dark clouds but also nostalgic memories which breaks the monotonicity of day-to-day life. Nice work seeped with emotions.
बड़ा दुखदायी आखिरी दृश्य।
behad sundar, Parul :)...aise ekant aur aisi dhoop ko jaanti hun main...
बहुत सुंदर भीना भीना सा...
मोरपंखी स्पर्श यादों पे... बहुत खूबसूरत ....
मन की खिडकियों से आत्मा के भीतरी फर्श तक... बहुत बढियां लिखा है आपने... !!!
आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी की लगाई है!
यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।
हम्म्म....नो कमेंट....जरा जल्दी जल्दी लिखा करो!!
bahut umdaa... never thought some1 will so prosaically describe 'The End' of that masterpeice by Shyam Benegal 'Junoon'... I love the movie... & ur post too
mai shiddat se har baar us antim drashya ka intzaar karti huun...
khaaskar Javed aur ruuth ke beech
US AAKHIRI MAUN SAMVAAD KAA
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