
इस समय
जबकि..
होम में झुलसी उँगलियों
पर
ठंडी फुहारे हैं,
समूचा सावन
बेतरतीब
उतर रहा है / देह के पोर-पोर
इस समय
जबकि
जीवन पद्य से अधिक गद्य
हो चला है
उबाऊ हो रही हैं
कृष्ण के महारास की कथायें,
राधा मंद-मंद मुस्काती,
निरखती है
गोपियों संग
नटवर की परछाईं
भक्ति..
व्यभिचारिणी हो
जगह-जगह
खन रही है
कूप,
समय बिताने के लिए
करना है कुछ काम की तर्ज़ पर
आये दिन मित्रताएं
दर्ज़ हो रही हैं …
एक ही इंसान
कईयों का ख़ुदा बना बैठा है
भ्रम टूटे ,
साथ छूटे हैं
बीते वर्षों के कुहासे से
आँख डबडबायी हैं
इस समय
जबकि
अंतस की रुदालियाँ छिप-छिप
कर रोती हैं
हलक का स्वर
चिपक कर रह गया है
तालू में!
एक बच्चे की आँख
बरबस हंसा जाती है
जो ..
कंठस्थ पाठ की पहली पंक्ति भूल
मेरे चेहरे
और
होठों को
झपक-झपक पलकों से तकता है / ये दोहराता हुआ कि आप बताइयेगा नहीं
मुझे सब याद है!
चित्र-गूगल
17 टिप्पणियाँ:
मन्त्र मुग्ध करती इस रचना के लिए उपयुक्त प्रशंशा के शब्द कहाँ से लाऊं? कमाल किया है आपने.
नीरज
सुन्दर्।
behtareen rachna
aap bataiyega nahin... mujhe sab yad hai....
bahut sundar rachna... shukriya...!!!
अद्भुत शब्द-विन्यास, सृजनात्मकता को प्रणाम।
अपने ही को चैलेंज करती रहती हैं ! अच्छा है. ! मजबूर हुए कुछ कहने को.
जीवन गद्य से पद्य हो चला है......
अद्भुत, आभार.
sunder rachna.
आज-कल, छोटे-बड़े सब याद आ जाते हैं. मुस्कुराने को मजबूर करतीं पंक्तियाँ, बढ़िया!
बच्चे की आँख .....और कई प्रश्न -उत्तर साथ ही ....एक ही समय ....
बहुत खूब!
पद्य से गद्य हो गए जीवन में एक 'नन्हे शिव' के मासूमियत भरे अंदाज़ द्वारा रस का संचार, क्या बात है.
अवध लाल
bahut sundar...man hara ho gaya :)
मेरे पास शब्द नहीं है , आपकी इस कविता की तारीफ के लिये ... बहुत सुन्दर रचना .. प्रेम रस में भीगी हुई ...
बधाई दिल से ...
आभार
विजय
कृपया मेरी नयी कविता " फूल, चाय और बारिश " को पढकर अपनी बहुमूल्य राय दिजियेंगा . लिंक है : http://poemsofvijay.blogspot.com/2011/07/blog-post_22.html
बहुत सुंदर कविता पढते पढते मन कहाँ खो गया पता ही नहीं चला...
पारुल यह कविता तो कुछ अलग ही रची है। न जाने किस मूड, किन विचारों में खोकर। बहुत पसन्द आई।
घुघूती बासूती
कितना सुंदर लिखती हैं आप, कितना सुंदर.
बस पढ़ कर आँखें डब-डबा जाती हैं, एक शांत मुस्कान के साथ.
जादू है आपके शब्दों में.
जितना सुंदर सोचती हैं, उतना ही सुंदर लिख भी देती हैं.
वन्दनीय और प्रेरणा हैं हमारे लिए.
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