Tuesday, April 5, 2011

वन मस्ट हैव अ गार्डेन एंड अ डिलीट बटन



अहा! ज़िंदगी पत्रिका के होली अंक में प्रकाशित


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6 टिप्पणियाँ:

शिवकुमार ( शिवा) said...

पेड़ होंगे तो ही हमारा जीवन होगा ..बहुत सुंदर लेख ,

नीरज गोस्वामी said...

बेहतरीन लेख है ये...पौधों को बढ़ते फलते फूलते देखने एक ऐसा अनुभव है जिस से कभी मन नहीं भरता...
नीरज

प्रवीण पाण्डेय said...

हमारे चाहने से वह बटन जीवन में उभरने लगता है।

Udan Tashtari said...

सुन्दर आलेख...

अरूण साथी said...

बधाई।

prkant said...

बधाई....छ्पने की.