Saturday, March 5, 2011

कौन से पानी में तूने कौन सा रंग घोला है


"प्रिय तेरी चितवन ही में टोना" ..गाते निकलते हैं बहुत सबेरे कुछ लोग . एक ढोलक, एक मंजीरा और हारमोनियम पर . क्षितिज पर सुर्खी फैल रही होती है, कान पीछा करते हैं फ़कीराना आवाज़ों का.निष्काम भाव,अद्भुत लगन .


कैसा तो जमाली है ,टोनहा मन …जो किसी पर ज़ाहिर हो जाये तो.... बेबस जानते-बूझते उसकी जादू भरी निगाह की सिम्त अपलक निहा्रे ... डोलता फिरे आगे-पीछे, टेकता माथा दरगाहों पर .बांधता मन्नतों की लाल-पीली डोरियाँ, जालीदार दरीचों ,सहन में खड़े पेड़ों पर . दुनिया देखे देखती रहे ,बनाये मख़ौल उसे ख़बर कहाँ . बारहा उठाया जाए मायावी चौखट से…पर घूम-फिर…वही-दर, उसी चितवन की दरकार .

रील चलती है "अमुक वेडस अमुक" यहाँ भी वही जुनून ,उसी शरीर निगाह की बात
पूरी फ़िल्म को नायक का मौन साधे रहता। जो कह दिया होता गिरह कर रखा है तेरी एक निगाह ने तो तयशुदा दृश्य उबाऊ हो जाता ." छापतिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलायके " गुनगुनाता रहा बस… कहा ही नही . अनकहा ध्वनित होता रहा.... नायिका के वाम अंग फड़कने लगते . तरंगे जा पहुंचती उसके अवचेतन तक ।

नायक…विवश,उपेक्षित... नसीब के लिखे से उसे निजात नही . चुप , उसकी आंखों से छलकती … नेह की ह़र नन्ही बूंद छींट बनकर उतरती किसी ज़िद्दी के चित्त पर. नायक अवश सहता रहता सारी बेअदबियां , बुहारता राह की सभी किरचें पलकों -पलकों । खड़ा रहता उसी दरवाज़े सजदे में . झरते हैं हरसिंगार पूरी रात गीली मिट्टी पर भोर की अगवानी में जैसे…

नज़र टोटके से बंधी थी… जिसका दूसरा छोर टोना करने वाले के पल्ले में अटक कर रह गया था । मौन चितेरा, बिना थके,आहिस्ता-आहिस्ता फेरता रहा अपनी तूलिका.. न जाने कब मायावी किसी एक छींटे से अपना सर्वस्व भीगा हुआ पाता है . समूची कायनात फ़ागुनी हो उठती .... टोना करने वाली नज़र बीच राह टेसुओं के रंग में भीजती,अरज करती सुनाई पड़ती -


मेर बालम रंग मेरा साजन रंग
मेरा कातिक रंग मेरा अगहन रंग
पल-पल रंगते रंगते मेरे
आठो पहर मनभावन रंग
मेरी हद भी रंग सरहद भी रंग
मेरी हद रंग दे अनहद भी रंग दे
रंगरेज मेरे दो घर क्यों रहें
एक ही रंग में दोनो घर रंग दे
नैहर पीहर का आंगन रंग
नींदे रंग दे करवट भी रंग
ख्वाबों से परे सलवट भी रंग……

ऐ रंगरेज़ मेरे…ये कौन से पानी में तूने
कौन सा रंग घोला है

स्वर-वडाली बंधु
फ़िल्म-तनु वेडस मनु
बोल-राज शेखर

13 टिप्पणियाँ:

डॉ. मनोज मिश्र said...

बहुत ही खूबसूरत ,मन मगन हो गया,आभार.

प्रवीण पाण्डेय said...

एक ही रंग में दोनों घर रंग। फिल्म देखनी होगी।

पद्म सिंह said...

सुंदर,,, अति सुंदर

Anonymous said...

behad khubsurat Parul ji, film se nikalne ke baad " rangrej mere " hi man me chalta raha.
Thaks for beautiful comment.
meen

Neeraj Rohilla said...

पारुल जी,
एक के बाद एक आपकी कई पोस्ट पढने के बाद टिप्पणी लिख रहा हूँ | इस गीत ने मन मोह लिया, आह क्या बात है. स्वर लहरी और ढोलक की थाप
अलसाई शनिवार की सुबह के एकदम मुफीद.

नीरज

Udan Tashtari said...

देखी नहीं यह फिल्म...मगर अब देखेंगे...गाना पसंद आया.

दिगम्बर नासवा said...

गाना लाजवाब है ... वडाली बंधुओं के कई गीत हैं मेरे पास ... जब जब सूफी अंदाज़ सुनना होता है वो सबसा पहली पसंद हैं मेरी ..
ये फिल देखि नहीं ... पता नहीं दुबई में आएगी या नहीं ... मौका मिला तो जरूर देखूंगा ..

वन्दना said...

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (7-3-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

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इंदु पुरी गोस्वामी said...

अरे! आपने इसे 'कृष्ण' की आवाज में नही सुना?इस नए गायक ने तो और भी कमाल गया है ये गीत.
मेरे तो जैसे तन मन में बस गया.बरसों बाद कोई नया गीत इतना भीतर तक उतर गया.राजशेखर ने क्या खूब लिखा है इसे.एक एक शब्द जैसे कहीं दूर ले जाता है और......................कोई जैसे मेरे करीब आ कर बैठ जाता है और पूछता है 'दोनों घर क्यों रहे???
मैंने कहा-'हाँ. एक रंग में रंग दे अब तो मेरे दोनों घर,रंगरेज मेंरे!'
गीतों की ख़ूबसूरती और गहराई से वाकिफ हो और डूबना,डुबाना दोनों जानती हो.
प्यार इस खूबसूरत गीत को 'हाई लाईट 'करने के लिए.

Dinesh pareek said...

बहुत ही सुन्दर विचार है आपके और उतनी सुन्दर आपकी हर पोस्ट बहुत ही अच्छा लगा आपके विचार जन के |
कभी मेरे ब्लॉग पे पधारिये शायद कुछ आपके विचारो से मिलती जुलती कुछ पोस्ट मेरे ब्लॉग पे भी मिलेंगी
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Manpreet Kaur said...

bouth he aacha post hai aapka good 1 dear
happy women's day...Visit My Blog PLz..
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रंजना said...

जो आनंद दिया न तुमने...बस ढेर ढेर आशीष....

प्लीज यह साउंड फ़ाइल मुझे मेल कर दो न...
बस लाजवाब है...
तुम्हारा लेखन और गीत चयन,बस निःशब्द आनंद मग्न कर दिया करता है....
जियो...

सागर said...

रंजना जी कि बात, सेम to सेम...

वेटिंग ... !