Monday, March 15, 2010

इतना मत बोलो…


इतना मत बोलो
मत बोलो इतना

बोलने से
ज़्यादा
होती है बारिश
मचता है शोर
मानस में
द्वंद्वों का

न बोलो इतना…


बोलने से
अतिशय
आती है बाढ़
चढ़ता सैलाब
पलकों में
बूंदों का

इतना न बोलो……


बोलने से
अधिक
उड़ती है आँधी
उठता बवंडर
प्रश्नों पे
प्रश्नों का

मत इतना बोलो…


बोलने से
बेहद
उपजता है बंजर
पड़ता अकाल
शब्दों में
भावों का


इतना मत बोलो
मत बोलो इतना




चित्र-साभार

17 टिप्पणियाँ:

pratibha said...

कैसे ना बोलूं पारुल जी कि बहुत सुंदर है ना बोलने की ये मनुहार.

डॉ. मनोज मिश्र said...

बोलने पर प्रतिबन्ध,, भाई वाह...

संजय भास्कर said...

बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
ढेर सारी शुभकामनायें.

संजय कुमार
हरियाणा
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

Arvind Mishra said...

अति का भला न बोलना ......सुन्दर रचना !

अमित said...

बहुत कोमल भाव और उतनी ही अच्छी अभिव्यक्ति!
बधाई!
सादर

M VERMA said...

बोलने से बेशक आँधी उठे पर ना बोलने से तो तूफान.
बेहतरीन रचना

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत ही लाजवाब रचना.

रामराम.

मनोज कुमार said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति!

शरद कोकास said...

बस जहाँ ज़रूरी है वहाँ बोलो ? सुन्दर कविता ।

Udan Tashtari said...

बोलना ही तो जड़ है हर बात की...


शानदार अभिव्यक्ति!!

Dr. Amarjeet Kaunke said...

meri kavita to bilkul ult haI....]

GAHRA HO ANDHERA JAB
AWAAZ TAB DENA ZAROOR
KAHIN NA KAHIN
KADAM DHOONDH HI LENGE
ANDHERE KAA KINARA.......

नीरज गोस्वामी said...

आपकी पोस्ट पर कमेन्ट करने में हमेशा मुश्किल होती है...सिवाय वाह के और कोई शब्द सूझता ही नहीं...लेकिन इस बार एक नहीं तीन बार वाह वाह वाह करने को जी कर रहा है...
नीरज

ललितमोहन त्रिवेदी said...

बोल अबोले जो रहे ,वे बोले भरपूर !
बिन बोले ही बहुत कुछ ,कहते रहे फितूर !!

सुशीला पुरी said...

बिना बोले ही बोल रही हूँ !!!!! अति सुंदर .

डॉ.ब्रजेश शर्मा said...

वाह वाह पारुल जी ,
बोलने से बंजर उपजना .......क्या सच्ची अनुभूति है ....इसी अहसास ने
तो ये रचना लिखवा ली है आपसे !
मुक्त छंद में आप अत्यंत भाव प्रवणता से मुखरित होती हैं !
सुन्दर रचना .................बधाई !

sidheshwer said...

जो है अकथ्य
उसी में छिपा है कथ्य.

बहुत ही बढ़िया..
सचमुच !!

दिलीप कवठेकर said...

अजीब दास्तां है ये, कहां शुरु कहां खतम....

नया खयाल है, रोचक और गर्मी की उमस में शीतलता, आंधी और बवंडर का एहसास कराता है.

बधाईयाम