Wednesday, March 10, 2010

एक कविता/एक आबिदा


काश

मेरा प्यार
तुम पर
इस तरह बरसता है
जैसे किसी पत्थर पर
लगातार
कोई झरना
गिरता है

काश

तुम्हे कभी बारिश में
किसी वृक्ष की भाँति
भीगने की
कला आ जाये


डॉ अमरजीत कौंके की कविता उनकी पुस्तक अंतहीन दौड़ से साभार

साथ ही आबिदा जो हर समय भली लगतीं हैं



इस दौर में क्या क्या है रुसवाई भी लज़्ज़त भी
काँटा हो तो ऐसा हो चुभता हो तो ऐसा हो


हमसे नही रिश्ता भी हमसे नही मिलता भी
है पास वो बैठा भी धोखा हो तो ऐसा हो


चित्र गूगल

16 टिप्पणियाँ:

नीरज गोस्वामी said...

अमरजीत जी की रचना अद्भुत है और आबिदा जी...सुभान अल्लाह...दोनों के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया...
नीरज

Kishore Choudhary said...

आबिदा जी को सुना शाम हसीन हुई.

सुशीला पुरी said...

आनंद ही आनंद !!!!!!!! पारुल जी इस अनहद नाद को खुद सुनने का आनंद ही अलग है .बधाई

Pandit Kishore Ji said...

bahut hi badiya rachna........ kaash

निर्मला कपिला said...

कौंके जी की रचनायें बहुत अद्भुत होती हैं और अबिदा ---- मज़ा आ गया सुन कर। धन्यवाद ,शुभकामनायें

दिगम्बर नासवा said...

Bahut hi khoobsoorat khyaal hai ..

राकेश कौशिक said...

अमरजीत जी की कविता गागर में सागर के सामान - बहुत बहुत खूब

मनोज कुमार said...

बेहतरीन। बधाई।

कार्तिकेय मिश्र (Kartikeya Mishra) said...

शाम का रंग और गाढ़ा कर दिया आपने..

गुम हुई जाती है अफ्सुर्दा सुलगती हुई शाम
धुल के निकलेगी अभी चश्म-ए-माहताब से रात

अजय कुमार said...

कमाल की अभिव्यक्ति, बधाई

Udan Tashtari said...

डॉ अमरजीत जी की रचना और उस के साथ आबिदा की गजल...वाह!!

राजभाषा हिंदी said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति! राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।

RaniVishal said...

Dr. Amarjit Sahab ki rachana bahut gazab ki hai aur Abida Parveen ko sun kar to mughd ho jana tay hi tha ..bahut bahut dhanywaad!
http://kavyamanjusha.blogspot.com/

varsha said...

kavita...aabida...
shukriya.

प्रवीण पाण्डेय said...

तुम्हे कभी बारिश में
किसी वृक्ष की भाँति
भीगने की
कला आ जाये

बहुत सुन्दर । मन चट्टान सा सपाट हो गया है । क्या करें, बरसात रुकती ही नहीं ।

Dr. Amarjeet Kaunke said...

parul... sabhi doston tak meri kavita pahunchaane ke liye behadd shukarguzar hun...un sabhi doston ka bhi abhaari hun jinhone apna wakt nikal kar tippni di.....