Thursday, December 17, 2009

आबिदा परवीन -अब किसी रोज़ न मिलने के बहाने आओ



...कितना कुछ सुना जाता है ....कभी धुन उलझा लेती है ,कभी गीत के बोल तो कभी कलाकार की गायकी ..... पर आबिदा आपा की आवाज़ सुनते-सुनते फितूरी हो जाना अजब सा है . इनमे कुछ फ़ितूर यहाँ दर्ज़ हुए हैं ... कुछ यूँ ही आवारा हो गए .....


रोज़ गुज़रना उस पुल से
जिसके नीचे दहकता है श्मशान
फिर भी जीवन के प्रति आसक्ति कम नही…
रोज़ होती हैं प्रार्थनाएं प्रत्यक्ष,अप्रत्यक्ष
बार-बार कई बार
फिर भी क्रोध पर वश नही...
दिन जाते जाते पसार जाता है सांझ
औ शाम थमा जाती है रात
कहीं तरस है ,कहीं दरस
कहीं इंतज़ार है तो कहीं वो भी नही……
झूठ के पीछे मुस्कुराता सच
सच की आड़ मे मुँह चिढ़ाता झू्ठ
खुदगर्जों के बीच-बीच कहीं कोई मददगार
बेईमानों के बीच ईमानदार…
बुरे दिन नही रहे
तो अच्छे दिन भी नही रहेंगे की तर्ज़ पर
आहिस्ता-आहिस्ता सरकते वक़्त में
बड़ी सुकून देती है ये.... आवाज़
ये खूबसूरत पाक आवाज़
******
***
*


आबिदा परवीन
तुमको देखे हुए गुज़रे हैं ज़माने आओ

25 टिप्पणियाँ:

Arvind Mishra said...

वाह बेहद उम्दा, बेकस !

निर्मला कपिला said...

पारुल लाजवाब प्रस्तुति है। परवीन जी को सुन रही हूँ। जितना उन्हें सुनो प्यास बढती जाती है बार बार सुनने की धन्यवाद

परमजीत बाली said...

बहुत बढिया पोस्ट...और गजल ..आभार।

मनोज कुमार said...

अच्छी रचना बधाई।

Udan Tashtari said...

ये फितूर तो गज़ब रहा!! और फिर आबिदा जी को सुनना...ओह!! अति आनन्द दायक काम्बिनेशन!!

हिमांशु । Himanshu said...

ऊपर की बहुमूल्य रचना के बाद स्वर सुनना एक गजब का अनुभव है । आभार प्रस्तुति के लिय़ॆ ।

कुश said...

ये फितुरियत आप पर हमेशा हावी ही रहती है.. कमाल का फितूर है..

आबिदा आप को तो सुबह से पाचवी बार सुन रहा हूँ..

कुश said...

डाउनलोड कर लिया अब तो.. :)

Kishore Choudhary said...

सच है कि शब्द बोलते ही नहीं वरन आस पास घना साया भी बुनते हैं ...आपकी कविता

आबिदा जी को सुनाने के लिए आभार.

kshama said...

Nishabd hun!

Amit said...

पारुल जी,
बहुत ही 'व्यवस्थित' कविता लगी,जैसे teacher कई बार good,very good,fair की तरह ही एक नोट दे दे की-neat,clean,proper and precise!!.
आबिदा जी के बारे में क्या कहें -जो इश्वर की इबादत में गाते है,उनसे प्यारा कौन होता है ? एक वाकया याद आ गया,दिल्ली में चिश्ती की दरगाह पे दर्शन के बाद पास ही में हुमायूँ के मकबरे पर आबिदा जी का प्रोग्राम हो रहा था,हम दो थे.टिकेट लेने गए तो एक आखरी ही बचा था..निराश से खड़े थे ,पास ही एक अँगरेज़ खड़ा था,थोड़ी देर बाद वो बोला की वो जिसका इंतज़ार कर रहा था वो नहीं आया,तो आप मेरे दोनों टिकेट ले लो.....आबिदा जी को लाइव सुन पाया....ये रिकॉर्ड भी जबरदस्त hai.......

नीरज गोस्वामी said...

आभार इस जादुई आवाज़ का ( आबिदा परवीन) जिस की वजह से आप इतनी खूबसूरत नज़्म कह पायीं...पारस पत्थर का सा स्पर्श मिल गया है आपको...ववाह
नीरज

कंचन सिंह चौहान said...

kavita ki pahali teen line me vo darshan jise aaj kal adhik feel kar rahi hun

is geet ka to kahana hi kya

meeta said...

अब किसी रोज ना मिलने के बहाने आओ .... thanks for make me smile once more on this line.... :)

चंदन कुमार झा said...

सुन रहे है अभी, सच में अद्भुत है यह संगीत……………

अमित said...

bahut sudar!
aapakipost bhi aur ghazal bhi.
aabida jee ko sunavaane ke liye shukriya.

वन्दना अवस्थी दुबे said...

आबिदा जी मेरी बहुत प्रिय हैं. खासतौर से उनकी गाई कबीर की साखियां. बहुत सुन्द. साधुवाद.

दिगम्बर नासवा said...

लाजवाब प्रस्तुति ........ ग़ज़ब का फितूर है ........ आवारगी है जो अंजाने ही कुछ कह जाती है ..........

pragya pandey said...

waah bahut sunder .. man bhaawan hai

कार्तिकेय मिश्र (Kartikeya Mishra) said...

बेहद खूबसूरत...

आबिदा मेरी कुछ पसंदीदा गायिकाओं में से एक हैं!

नव्‍यवेश नवराही said...

आबिदा
;;;;;;;;;;;;;;;;;

sandhyagupta said...

Bahut sundar prastuti.

Nav varsh ki dheron shubkamnayen.

डॉ. मनोज मिश्र said...

वर्ष नव-हर्ष नव-उत्कर्ष नव
-नव वर्ष, २०१० के लिए अभिमंत्रित शुभकामनाओं सहित ,
डॉ मनोज मिश्र

श्रद्धा जैन said...

baat kahne ka andaaz khoob hai
roj kuch na kuch maangna
bahut achchha laga abida ji ko sunna

MUFLIS said...

एक पुर-कशिश आवाज़ ....
जैसे आसमान से जादुई नूर की बरसात
जैसे आँखों से पाकीज़ा अश्क रवां-दवाँ
जैसे बे-गरज़ दुआओं का सिलसिला
जैसे
सुकून...
तस्कीन...
आराम....

आपकी इनायात का बहुत बहुत शुक्रिया
और
आपकी नायाब रचना के लिए
बहुत बहुत मुबारकबाद