
भोर के स्वर हैं...
ईश है...
आशीष है ..
दो गीत अलग अलग आवाजों में ...
घट घट में पंछी बोलता
आप ही डंडी आप तराजू
आप ही बैठा तौलता ...
स्वर--वीणा सहस्रबुधे
ज़िंदगी को संवारना होगा
दिल में सूरज उतारना होगा
स्वर -येसुदास
जो कोई हूक हो "जी" में,तो गूँज उट्ठेंगे… ये बिरही सुर कोशिशों से साधे नहीं जाते…

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17 टिप्पणियाँ:
यसुदास बहुत सुन्दर। सवेरे सवेरे सुनना अलौकिक रहा!
भोर के स्वर हैं...
ईश है...
आशीष है ..
-वाकई, सुनकर वैसा ही लगा!
आपके चयन, मन के प्रतिबिम्ब हैं.
सुन्दर शुभप्रभात धन्यवाद। और क्या कहूँ जब सुबह सुबह ऐसी रचना पढने को मिले तो ऊर्जा बनी रहती है शुभकामनायें
राधा बुलाये कहाँ खोये हो कन्हैया...
का करूँ सजनी... लगे ना...
यह आलाप का जादू किसी के पास नहीं येसुदास अपवाद हैं...
वीणा जी की मधुर आवाज़ हम तक पहुँचाने के लिए कोटिश धन्यवाद...
नीरज
बहुत सुंदर. शुभकामनाएं.
रामराम.
मेहरताबा से जा कर कह दो,
अपनी किरनो को गिन के रख्खे ।
मै अपने सहरे के ज़र्रे ज़र्रे को,
खुद चमकना सिखा रहा हूं ।
ज़िन्दगी को सवारना होगा दिल में सूरज उतरना होगा . वाह .. पारुल सुखद है येसुदास को सुनना
thanx a lot
सायं में भी भोर की याद ताजा हो गयी ......... मधुर स्वर हैं ......
बहुत सुन्दर गीत सुनवाए - आभार !
Abhi sahej liya hai...Jaldi hi sunti hun...Aabhaar..
nice
Bahut Umda rachna........
दिन की इतनी खूबसूरत शुरुवात आज तो दिन अच्छा जायेगा । दोनो भजन बहुत सुंदर ।
मुझे आपका ब्लॉग बहुत अच्छा लगा! बहुत ही सुंदर और शानदार रचना लिखा है आपने जो काबिले तारीफ है! मेरे ब्लोगों पर आपका स्वागत है!
Bahut umda prastuti.Badhai.
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