Sunday, October 25, 2009

घट घट में पंछी बोलता-वीणा सहस्रबुधे-येसुदास


भोर के स्वर हैं...
ईश है...
आशीष है ..

दो गीत अलग अलग आवाजों में ...

घट घट में पंछी बोलता
आप ही डंडी आप तराजू
आप ही बैठा तौलता ...
स्वर--वीणा सहस्रबुधे



ज़िंदगी को संवारना होगा
दिल में सूरज उतारना होगा
स्वर -येसुदास

17 टिप्पणियाँ:

ज्ञानदत्त पाण्डेय| Gyandutt Pandey said...

यसुदास बहुत सुन्दर। सवेरे सवेरे सुनना अलौकिक रहा!

Udan Tashtari said...

भोर के स्वर हैं...
ईश है...
आशीष है ..


-वाकई, सुनकर वैसा ही लगा!

Kishore Choudhary said...

आपके चयन, मन के प्रतिबिम्ब हैं.

Nirmla Kapila said...

सुन्दर शुभप्रभात धन्यवाद। और क्या कहूँ जब सुबह सुबह ऐसी रचना पढने को मिले तो ऊर्जा बनी रहती है शुभकामनायें

सागर said...

राधा बुलाये कहाँ खोये हो कन्हैया...

का करूँ सजनी... लगे ना...

यह आलाप का जादू किसी के पास नहीं येसुदास अपवाद हैं...

नीरज गोस्वामी said...

वीणा जी की मधुर आवाज़ हम तक पहुँचाने के लिए कोटिश धन्यवाद...
नीरज

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत सुंदर. शुभकामनाएं.

रामराम.

sheljasoni said...

मेहरताबा से जा कर कह दो,
अपनी किरनो को गिन के रख्खे ।
मै अपने सहरे के ज़र्रे ज़र्रे को,
खुद चमकना सिखा रहा हूं ।

pragya said...

ज़िन्दगी को सवारना होगा दिल में सूरज उतरना होगा . वाह .. पारुल सुखद है येसुदास को सुनना
thanx a lot

दिगम्बर नासवा said...

सायं में भी भोर की याद ताजा हो गयी ......... मधुर स्वर हैं ......

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

बहुत सुन्दर गीत सुनवाए - आभार !

रंजना said...

Abhi sahej liya hai...Jaldi hi sunti hun...Aabhaar..

rahul kumar said...

nice

Seema Bisht said...

Bahut Umda rachna........

Mrs. Asha Joglekar said...

दिन की इतनी खूबसूरत शुरुवात आज तो दिन अच्छा जायेगा । दोनो भजन बहुत सुंदर ।

Babli said...

मुझे आपका ब्लॉग बहुत अच्छा लगा! बहुत ही सुंदर और शानदार रचना लिखा है आपने जो काबिले तारीफ है! मेरे ब्लोगों पर आपका स्वागत है!

sandhyagupta said...

Bahut umda prastuti.Badhai.