Saturday, July 11, 2009

चलो इक ताज महल बोएँ


मेरे फ़ितूरों की फ़ेहरिस्त का सबसे अज़ीज़ फ़ितूर… चलो इक ताजमहल बोएँ ……जिसे काफ़ी अरसा पहले पोस्ट किया था… समय बहुत गुज़र गया तब से अब तक…आज पन्ने पलटे तो लगा , बहुत सी बाते अपनी अहमियत कभी नहीं खोती……ज़रा से फेर बदल के बाद री-पोस्ट कर रही हूँ………




चलो इक ताज महल बोएँ

अभी हाथो मे जुम्बिश है
अभी सीने मे धड़कन है,
अभी खूं मे रवानी है
चलो इक ताज महल बोएँ

अभी जमुना मे पानी है
अभी पूनम सी रातें हैं
उम्र का चढ़ता दरिया है
चलो इक ताज महल बोएँ

अभी पलकों में परियाँ हैं
अधजगीं आधी रतियाँ हैं
अनकही सारी बतियाँ हैं
चलो इक ताज महल बोएँ

फसल जब लहलहाएगी
बीस-इक साल गुज़रेगें
ज़िन्दगी ढल रही होगी
दिवस अवसानमय होंगे …

अमावस की कठिन घड़ियों में
अपनी धुधलीं आँखों से…
चमकता ताज देखेंगें
तब अपना ख्वाब देखेंगे

अभी हाथों में संबल है
अभी सावन सताता है
अभी तनमन सलोना है
चलो इक ताज महल बोएँ

चित्र साभार

12 टिप्पणियाँ:

Udan Tashtari said...

तब भी अच्छा लगा था और अब भी!!

M VERMA said...

अभी जमुना मे पानी है
अभी पूनम सी रातें हैं
उम्र का चढ़ता दरिया है
चलो इक ताज महल बोएँ
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bahut khoob sunder abhivyaki

ओम आर्य said...

ख्वाबो को बोना क्या बात है आपने कही है ......सपना सा सलोना लग रहा है बहुत खुब

कंचन सिंह चौहान said...

आमीन....!!!!!!! हम भी आयेंगे मोहतरमा बीस एक साल बाद धुँधलकी आँखों से उस ताज महल को देखने..!

कंचन सिंह चौहान said...

आमीन....!!!!!!! हम भी आयेंगे मोहतरमा बीस एक साल बाद धुँधलकी आँखों से उस ताज महल को देखने..!

mehek said...

bahut sunder

डॉ. मनोज मिश्र said...

बेहतरीन .

नीरज गोस्वामी said...

कमाल के शब्द पिरोये हैं आपने इस असाधारण रचना में...गज़ब के भाव हैं...आनंद आ गया...वाह.
नीरज

poemsnpuja said...

behad khoobsoorat, behad pyaara.

vakai kuch kavitayein hamesha ke liye hoti hain

Manish Kumar said...

समीर जी सा ही खयाल उठा मन में
:)

गौतम राजरिशी said...

ताजमहल को लेकर जाने कितना कुछ लिखा गया है अब तक...ग़ज़ल, गीत, कविता, नज़्म...
इस बोने वाली कल्पना तो शायद ही किसी कवि ने की है अब तक..
एक अप्रतिम रचना, पारूल...नहीं, महज तारीफ़ करने की खातिर नहीं कह रहा।
वैसे भी आप जानती हो, इस "मेरे फ़ितुर" का दीवाना हूँ मैं!

Vijay Kumar Sappatti said...

amazing poem, great thoughts , excellent words. aal put togather a great poem .. i really enjoyed it reading..

vijay

pls read my new poem "झील" on my poem blog " http://poemsofvijay.blogspot.com