
ना सरवर ना बावड़ी ना कोई ठंडी छाँव'
ना कोयल न पपीहरा ऐसा मेरा गाँव रे…

अंगारे भी लगने लगे आज मुझे मधुमास रे

तुझे आंचल मे रखूंगी ओ सांवरे
काली अलकों से बांधूगी ये पाँव रे
गलबहिया वो डालूं कि छूटे नहीं
मेरा सपना सजन अब टूटे नहीं

ओ मेरे सावन सजन ओ मेरे सिंदूर
साजन संग सजनी बनी
मौसम संग मयूर
चार पहर की चाँदनी मेरे संग बिता……

अंग लगा के साहिबा कर दे मुझे निहाल रे

तू चंदा मै चाँदनी तू तरुवर मै शाख़ रे
तू बादल मै बिजुरी तू पंछी मै पात रे
गीत - तू चंदा मै चाँदनी
फ़िल्म-रेशमा और शेरा
संगीत-जयदेव
बोल-बाल कवि बैरागी
स्वर-लता मंगेशकर
इस संगीत की शान में कुछ और कहना मेरे बस की बात नही ........