
दशहरा की भोर-और अगवानी में - राजन -साजन मिश्र के स्वरो मे रची बसी तुलसी की यह अद्धभुत रचना -
अलबम- भक्तिमाला
जागिये रघुनाथ कुँवर पंछी बन बोले ॥
चंद किरन सीतल भई चकई पिय मिलन गई ।
त्रिबिध मंद चलत पवन पल्लव द्रुम डोले ॥
प्रात भानु प्रगट भयो रजनी को तिमिर गयो ।
भृंग करत गुंजगान कमलन दल खोले ॥
ब्रह्मदिक धरत ध्यान सुर-नर-मुनि करत गान ।
जागन की बेर भई नयन पलक खोले ॥
तुलसीदास अति अनन्द निरखि के मुखारबिंद ।
दीननको देत दान भूषन बहु मोरे ॥









18 टिप्पणियाँ:
बहुत खूब!! आनन्द आ गया मगर हो कहाँ??
तस्लीम की पहेली हो भी ली और आपका पता ही नहीं..जबकि बगीचे वाली चिड़िया पर थी..आप तो पक्का जान जातीं. :)
मनप्रिय और
कर्णप्रिय भी
मन को
मोहित करती
हुई संगीत लहरी।
जागिये रघुनाथ कुँवर पंछी बन बोले ॥
चंद किरन सीतल भई चकई पिय मिलन गई ।
Simply divine, thanks!
क्या बात है पारुल...राजन साजन मिश्र तो मेरे वर्चुअल औडियो गुरु ही हैं, उन्हें सुनने में जो मज़ा आता है उसका बयान करना मुश्किल है। बनारस घराने के काबिल उत्तराधिकारी....शुक्रिया इसे अपलोड करने का।
आपको शुभ विजयादशमी
मगन कर दिया ! नमन मिश्रा बंधुओ को ! दशहरे की शुभकामनाएं !
जागिये रघुनाथ कुँवर पंछी बन बोले ॥
चंद किरन सीतल भई चकई पिय मिलन गई ।
बहुत खूब...
विजयदशमी की हार्दिक मंगलकामनाएं...
वाह बहुत खूब दशहरे की शुभकामनायें आपको सपरिवार
आनन्दम,आनन्दम! लेकिन सुन नहीं पाये अभी तक! नेट धीमा है शायद!
अद्भुत...विजय दशमी का इस से बढ़िया उपहार कोई क्या देगा...अमृत वर्षा हो गयी सुरों की...वाह...धन्य हुए..
नीरज
वाह पारुल जी ,
आननद आ गया. इतनी सुहानी सुबह प्रदान करने के लिए आभार.
प्रात: नेट की धीमी गति ने इसका आनंद लेने में बाधा पैदा की ;अब इत्मीनान से सुना गया है.अभी तो सुरूर इसका तारी है. आज दशहरे के दिन 'रजनी को तिमिर गयो हम सबके जीवन में चरितार्थ हो, यही कामना है.
आपके स्वर में विद्यापति कब अवतरित होने जा रहे हैं ? अनुरोध का ध्यान रहे.
sabhi mitron ka dhanyavaad ...
sidheshwer ji
kavita likhit ruup me mili nahi mujhey .. galat gaaney ke dar se vo munsha adhuuri rah gayi...ab aalasya tyaag kar kitaab hi khareedti huun...
रघुनाथ कुंवर का जिक्र और पंडित राजन एवं साजन मिश्र की आवाज़ ने विजयादशमी का आनंद दूना कर दिया। आभार
यह तो आजके दिन आनंदित कर दिया इस गायन ने!
बहुत धन्यवाद।
भावातीत ! समीर जी का प्रश्न अनुत्तरित है -मैंने भी उस पक्षी पहेली पर आपको काफी याद किया !
विजया दशमी की शुभकामनाएँ भेज रही हूँ ...what a beautiful song ...thanx for the clip ..
स स्नेह्,
लावण्या
पारूल दी.
मन को दमकाने वाली रचना है यह.
राजन-साजन मिश्र बनारसी ठाठ को जीवित रखे हुए हैं.हमारे संगीत का ख़ालिसपन सुनाई देता है इनकी गायकी में.
आपने दशहरा सुरीला बना दिया.
राम राम.
तुलसी बाबा जब ’ अति अनन्द ’ कहते हैं तो हमारे ही अतिशय आनन्द को वाणी देते हैं . समूची सृष्टि के जागने का भावपूर्ण चित्र खींचती कमाल की प्रभाती है ’जागिए रघुनाथ कुंवर’.
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