भारतीय रेल विभाग की कृपा से हमारी ये पोस्ट लिखी व सुनी जा रही है। कानपुर जाने वाली हमारी ट्रेन 2 घंटे विलम्ब से आने की सूचना मिली है तो इस बीच किया क्या जाये? अब तो डर सा लग रहा है कहीं ट्रेन के लिये बनायी गयी पूड़ियां भी घर मे ही न खानी पड़ जायें । खैर अभी तो गाना सुन रही हूँ और बैठे बैठे अपनी 99वी पोस्ट लिख रही हूँ । आप भी अगर शौक़ रखते हैं इन बेमिसाल फ़नकारा को सुनने का तो --
स्वर-आबिदा परवीन
बोल-ले चला जान मेरी
रूठ के जाना तेरा
boomp3.com
Wednesday, May 14, 2008
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9 टिप्पणियाँ:
चलिये अच्छा हुआ आपकी रेलगाड़ी देर से जा रही है. हमें कुछ बढ़िया सुनने को तो मिला. यह ग़ज़ल मैंने ग़ुलाम अली की आवाज़ में सुनी थी लेकिन उसकी अदायगी इतनी सुन्दर नहीं थीं. बहुत अच्छा अन्दाज़ है आबिदा बेग़म का.
ट्रेन वाली पूड़ियां यदि घर पर ही खाने का प्लान बने तो सौवीं पोस्ट भी आज ही लगा दीजिएगा.
फ़िलहाल ट्रेन के लिये ऑल द बेस्ट. और वो क्या कहते हैं ... हैप्पी जर्नी ...
aabida begam ki aavaj me pahli baar suni hai ye gajal.......aapki train ka to pata nahi par aapne din bana diya....
अरे पारुल,
अब कानपुर के सा थियोँ से मुलाकात की पोस्ट लिखो जल्दी ..
nice song ..
और पूडी के साथ कौन सी सब्ज़ी थी वो तो बताया ही नही ;-)
-- लावण्या
बहुत बढ़िया रहा रेल का देर हो जाना. उम्दा गीत.
पूड़ी घर में खाई कि रेल में??
khubsurat geet...kanpur me hamri taraf se swagat
आपकी ट्रेन का लेट होना हम सभी के लिए अच्छा रहा। खूबसूरत गीत जो सुनने को मिला।
खैर आज तो आप कानपुर मे होंगी ।
आपकी सौंवी पोस्ट का इंतजार रहेगा।
वैसे एडवांस मे बधाई दे देते है।
भगवान करे आपकी त्रेन रोज लेट हुआ करे और हमें बढ़िया नगमें सुनने को मिलते रहें।
:)
parul ji...aap itna behtareen sangeet sunwaati hain ki jee khush ho jata hai.
आबिदा परवीन की आवाज़ और गायकी का जवाब नहीं। काश! कि इसे विडियो के रूप में देखने को मिल जाए तो उनकी अदायगी से कान तो क्या आंख भी हट ना पाएगी।जब कोई शख़्स उनको स्टेज पर पहली बार सुनने के लिए जाता है तो भाव कुछ भिन्न होते हैं लेकिन आवाज़ और उनकी अदायगी से एक दम क़ायल हो जाता है। ecstacy की सी हालत हो जाती है।
उनकी आवाज़ सुनवाने के लिए बहुत धन्यवाद!
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